तभी सुनाई दिया मुझे राग दुर्गा मंगलेश डबराल की भावपूर्ण रचना

शास्त्रीय संगीत के विलक्षण कलाकार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत पंडित भीमसेन जोशी नहीं रहे। कवि मंगलेश डबराल ने उन पर सुंदर भावपूर्ण रचना लिखी थी। वेबदुनिया पाठकों के लिए प्रस्तुत है मंगलेश डबराल की संवेदनशील रचना :

राग दुर्गा

सितार वादन का घराना हैं पंडित रविशंकर

पंडित रविशंकर भारतीय शास्त्रीय संगीत का ऐसा चेहरा हैं, जिन्हें विश्व संगीत का गॉडफादर कहा गया है। वे केवल सितार वादक नहीं, बल्कि एक घराना हैं जिसका नई पीढ़ी के साधक अनुसरण कर रहे हैं।

पंडित रविशंकर देश के उन प्रमुख साधकों में से हैं, जो देश के बाहर काफी लोकप्रिय हैं। वे लंबे समय तक तबला उस्ताद अल्ला रक्खा खाँ, किशन महाराज और सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान के साथ जुड़े रहे।

क्या ख्याल हैं आपका?

ख्याल अरबी भाषा का शब्द जिसका अर्थ हैं विचार या कल्पना. आज मेरे मन में विचार आया कि आपको अपना ख्याल बताया जाए .सुंदर,सांगीतिक,स्वरबध्द ख्याल.

यमनी बिलावल

यमनी बिलावल राग की रचना कल्याण थाट से मानी गई है। इसमें दोनों मध्यम तथा शेष स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते हैं। इसकी जाति सम्पूर्ण मानी जाती है। वादी स्वर पंचम और संवादी षडज है। गायन समय प्रातःकाल दिन का प्रथम प्रहर है।

जैत कल्याण

इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से मानी गई है। सभी स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते है। मध्यम और निषाद वर्ज्य होने से इसकी जाति ओडव मानी जाती है। वादी पंचम और संवादी ऋषभ है। गायन समय रात्रि का प्रथम प्रहर है।

  1. पकड़– रे म॑प, ध प म॑प, ग म रे, ग नि सा।
  2. थाट – कल्याण थाट
  3. वर्ज्य स्वर – आरोह में गंधार और धैवत वर्ज्य है
  4. जाति – औडव-औडव
  5. वादी – संवादी – प – रे

गायन समय -गायन समय रात्रि का प्रथम प्रहर है।

राग परिचय

हिंदुस्तानी एवं कर्नाटक संगीत

हिन्दुस्तानी संगीत में इस्तेमाल किए गए उपकरणों में सितार, सरोद, सुरबहार, ईसराज, वीणा, तनपुरा, बन्सुरी, शहनाई, सारंगी, वायलिन, संतूर, पखवज और तबला शामिल हैं। आमतौर पर कर्नाटिक संगीत में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों में वीना, वीनू, गोत्वादम, हार्मोनियम, मृदंगम, कंजिर, घमत, नादाश्वरम और वायलिन शामिल हैं।

राग परिचय