आगरा घराना
आगरा घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध घरानों में से एक है। आगरा घराने के जन्मदाता तानसेन के दामाद हाजी सुजान साहब थे। आगरा घराने में जिन्होंने पूरे देश में ख्याति प्राप्त की उनका नाम था उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ। फ़ैयाज़ खाँ की आवाज़ बहुत दमदार थी और ये महफिल में अपना अनोखा रंग जमा देते थे।
विशेषता
1. नोम-तोम में आलाप करना
2. खुली जोरदार आवाज़ में गाना
3. लय ताल पर विशेष जोर।
संस्थापक
हाजी सुजान खान और उस्ताद घग्घे खुदा बख्श
प्रतिपादक
फ़ैयाज़ खान
लताफ़त हुसैन खान
दिनकर काकिनी
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ग्वालियर घराना
ग्वालियर घराना हिंदुस्तानी संगीत का सबसे प्राचीन
घराना है। हस्सू खाँ, हद्दू खाँ के दादा उस्ताद नत्थन पीरबख्श को इस घराने का जन्मदाता कहा जाता है।
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कुल्लियात
कुल्लियात (उर्दू: کلیات) शायरी में किसी शायर की रचनाओं के संग्रह को कहते हैं। मसलन ग़ालिब की ग़ज़लों और नज्मों के संकलन को 'कुल्लियात-ए-ग़ालिब' कहा जाता है। यह शब्द 'कुल' से आया है, यानि शायर का 'कुल' काम इस संग्रह में मौजूद होना चाहिए, लेकिन वास्तव में अगर शायर की कुछ-बहुत रचनाएँ भी उसमें सम्मिलित हों तो उसे कुल्लियात ही कहा जाएगा।
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मुशायरा
मुशायरा, (उर्दू: مشاعره) उर्दु भाषा की एक काव्य गोष्ठी है। मुशायरा शब्द हिन्दी में उर्दू से आया है और यह उस महफ़िल (محفل) की व्याख्या करता है जिसमें विभिन्न शायर शिरकत कर अपना अपना काव्य पाठ करते हैं। मुशायरा उत्तर भारत और पाकिस्तान की संस्कृति का अभिन्न अंग है और इसे प्रतिभागियों द्वारा मुक्त आत्म अभिव्यक्ति के एक माध्यम (मंच) के रूप में सराहा जाता है।
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तज़किरा
तज़किरा (फ़ारसी: تذکره) भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान और मध्य एशिया की बहुत-सी भाषाओँ में (जैसे कि उर्दू, फ़ारसी, उज़बेकी, पंजाबी) के साहित्य में किसी लेखक कि जीवनी को दर्शाने वाले उसकी कृतियों के एक संग्रह (यानि कुसुमावली) को कहते हैं। तज़किरे अधिकतर कवियों-शायरों के बनाए जाते हैं, हालांकि गद्य-लेखक का भी तज़किरा बनाना संभव है। कभी-कभी किसी व्यक्ति कि जीवनी या जीवन-सम्बन्धी कहानियों को भी 'तज़किरा' कह दिया जाता है। वैसे तो महत्वपूर्ण शायरों और अन्य व्यक्तियों पर हज़ारों तज़किरे लिखे जा चुके हैं लेकिन समीक्षकों ने आलोचना की है कि इनमें से बहुत से ऊट-पटांग ढंग से भी लिखे गए हैं
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राग परिचय
हिंदुस्तानी एवं कर्नाटक संगीत
हिन्दुस्तानी संगीत में इस्तेमाल किए गए उपकरणों में सितार, सरोद, सुरबहार, ईसराज, वीणा, तनपुरा, बन्सुरी, शहनाई, सारंगी, वायलिन, संतूर, पखवज और तबला शामिल हैं। आमतौर पर कर्नाटिक संगीत में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों में वीना, वीनू, गोत्वादम, हार्मोनियम, मृदंगम, कंजिर, घमत, नादाश्वरम और वायलिन शामिल हैं।